Thursday, 18 February 2016

सरग के सिढ़ही बनाबो

 

चलव चलव संगी 
जुरमिल के चलव 
सरग के सिढ़ही बनाबो
मनखे मनखे ल जोर के 
बांध सुनता के डोर मे
चलव चलव संगी
सरग के सिढ़ही बनाबो
जाति पाति ल टोर के 
छुआ छूत के मटकी ल फोर के
चलव चलव संगी
सरग के सिढ़ही बनाबो
कोनो मेर रहा हुत करबो जोरसे
मया के तरिया म नहाबो मुड़गोड़ ले
सुनता रइही त बिकास करही 
बिकास करहू त देस बढ़ही
हम आज खुद ल आघु बढ़ाबो
चलव चलव संगी
सरग के सिढ़ही बनाबो
फंसे हन धरम के गोठबात म
झगरा होथन जात पात म
भारत मां के बेटा आन
भारत वासी कहाबो
चलव चलव संगी
सरग के सिढ़ही बनाबो
जिनगी अपन हाथ म हे 
करम करके सजाबो
सुवारथ ल तियागके
सिच्छा के जोत जलाबो
एक बनो नेक बनो 
लइकन ल पढ़हाबो
चलव चलव संगी
सरग के सिढ़ही बनाबो
काबर बइठेंन दुसर के आस म
करबोन सुरू आपन बिसवास म
जेन कइही तेला संगी 
कहिके हमन सुनाबो
नइ देखे हे तेला 
नइ करें हे जेला 
करके हमन बताबो
चलव चलव संगी 
सरग के सिढ़ही बनाबो
दिखावा म नइ जावन 
बहकावा म नइ आवन
कतको खवा किरिया
हम तो नइ खावन
गलत रद्दा म संगी 
हम तो नइ जावन
चला अइसन करबो 
नवा सरग सिरजाबो
चलव चलव संगी 
सरग के सिढ़ही बनाबो

          सुखन जोगी 
                  डोड़की वाले
                       मो. 8717918364

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