Monday, 19 June 2017

जाँच करा लौ माटी के ( कुकुभ छंद)

कुकुभ छंद ( १६,१४)

जाँच करा लौ माँटी के

कहौं किसनहा भाई मन ला , जाँच करा लौ गा माँटी  |
जाँच देख के खातू डारौ, गोबर खत्ता हे खाँटी||

गाँव गाँव मा हवै एक झन ,  अगुवा कृषक संगवारी |
उही बताही सबो बात ला ,  ओला हवै जानकारी ||

जाँच बताथे खूबी खामी , बारा  ठन परिपाटी मा |
काला हम कतना कन डारन , अपन खेत अउ घाटी मा |

रसायनिक जम्मो खातू ला , जान रसायन के ढेला |
माटी बर उपजाऊ पन के , मेटत हे जीवन खेला  ||

🙏🏻🙏🏻

Tuesday, 22 March 2016

छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़
गोठ करंव अत्ती बढ़
परदेसिया बिलई कस झपागे
छत्तीसगढ़िया मुसवा बन लुकागे
लगथे सोये रहिस
तभे तो नी जागिस

हाना कहावत अउ हांकी
तन म लगा देथे आगी
सब कथे इहां के सुभाव बागी
फेर परदेसिया काबर रहिगे बांकी

अदला बदली के रित नदागे
करम के करमईता ह रिसागे
तभे किसनहा के खेत बेचागे
बाहिर के बेपारी घर म आगे

कंपनी  ल बनवा के
सरकार के आँखी ह मुंदागे
इहां के मन नई जानव कहिके
बहिरहा मन भितरियागे

का का गोठ ल बताव
कतेक ल मे सुनाव
सरकारी नऊकरी घलो हजावथे
काबर के आऊट सोर्सिंग नीति ह आवथे
  
सहीद के परवार लुलवावथे
नकसली मन सादी रचवावथे 
अपन समरपन करके
सरकारी नऊकरी ल पावथे

छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़
गोठ करव मैं अत्ती बढ़

हद हो गई

हद हो गई -हद हो गई
चोरों की बड़ी कद हो गई
धन दौलत तो चुराते ही थे
अब कविता चुराने लगे हैं
कवियों के सामने ही 
वो अपना बताने लगे हैं

गंगा को गोदावरी बताने लगे हैं
सरस्वती से बहती सविता चुराने लगे हैं
कवि ग्रुपों मे वो आते हैं
खुद को वो कवि ही बताते हैं
किसी की अच्छी कविता जब ये पाते हैं
कॉपी पेस्ट कर फौरन कहीं और चिपकाते हैं

कट कॉपी पेस्ट का जमाना है 
चोर बड़ा सातिर सयाना है
हमको लग गई है भनक 
उसको नही ये बताना है
चोरी की जब करे वो पोस्ट
शब्दों की डण्डे मार भगाना है

                         जोगी जी....

चोर हैं सब चोर हैं

हमने कहा 
चोर हैं सब चोर हैं
कोई मुक तो कोई मुहजोर है
ऐसे ही लोगों का तो
यहां पर अब जोर है
गोदी मे मजदूर काम चोर
मस्टर रोल पे सरपंच नाम चोर
उपर से इन्जिनियर घुसखोर है
चोर हैं सब चोर हैं
कोई मुक तो कोई मुह जोर हैं
कहते गांव मे सीसी रोड आयेगा
कच्चा रोड पक्का हो जायेगा
विधायक भी तो कमीशन खोर है
चोर हैं सब चोर हैं
कोई मुक तो कोई मुहजोर हैं
कहीं से आवाज आई..
गांव मे बोर खुदवायेंगे
पीएचई से पानी टंकी बनवायेंगे
गली गली नल जरूर लगवायेंगे
सड़कों के किनारे नालियां बनायेंगे
घर घर शौचालय भी बनवायेंगे
घर की गंदगी नालियों मे बह जायेंगे
अब आप ही बताओ 
हम नही तो और कौन खायेंगे
हां चोर हैं सब चोर है 
कोई मुक तो हम मुह जोर हैं
देखा तो सरपंच का ही शोर है

                         
                     सुखन प्रसाद " जोगी जी"
                        डोड़की (बिल्हा )
                          मो. 8717918364

चल मेरे मन

चल मेरे मन 
तु कहीं चल 
खुली वादियों में 
जरा सा निकल
आसमाँ के तले
सागर नीले नीले
पर्वत झाड़ी
घोड़ा गाड़ी
सैर को निकल 
चल मेरे मन
तु कहीं चल
ठण्डी हवायें
बाहें ये फैलाकर
मुझे बुलाये
संदेशा लाये
याद किया है तुझे
मुझे बताये 
यै मेरे मन 
चल तु चल
सुरज ने भी 
किया ईसारा
निकल गया 
दिन ये सारा
क्यो बैठा रहा
बनके बेचारा
या तु भी हो गया 
मन का मारा 
चल मेरे मन 
तु कहीं चल

                  "जोगी जी"

Wednesday, 9 March 2016

सोये को जगाने आया हूं

जागो - जागो 
सोयों को जगाने आया हूं
क्रांति की मशाल लेकर 
सतनाम की जोत जलाने आया हूं

दुसरों की आदर कब तलक
अपनो की निरादर कब तलक
जगाता रहूंगा सोये हो तब तलक
पुकारता रहूंगा सुनोगे नही तब तलक

दुसरों की बात मानते हो 
अपनों की नहीं
दुसरों की इतिहास जानते हो 
अपनों की नहीं

चलो - चलो 
मैं चलाने आया हूं
सतनाम का झण्डा लेकर
आगे - आगे जाने आया हूं

तुम्हें आग चाहिये
मैं चिंगारी लाया हूं
तुम्हें ठण्डी बयार चाहिये
मैं तुफान लाया हूं

तुम्हें सुख चाहिये 
मैं मुश्कान लाया हूं 
मुठ्ठी में भर के 
जीने का अरमान लाया हूं

जागो - जागो 
विद्रोही तान लाया हूं
अपना हक लेने का 
सामान लाया हूं

प्रसुप्त ज्वालामुखी में 
उदगार लाया हू 
सोये इन मुरदों मे
भरने फिर वही जान लाया हूं

सतनामियों की शान लाया हूं 
अपनों का अभिमान लाया हूं 
गौर से देखो अब 
सतनाम धर्म सास्वत गान लाया हूं

जागो -जागो
सतनाम विधान लाया हूं
पुनः बाबा जी का 
मैं बखान लाया हूं

           सुखन जोगी 
                   डोड़की , बिल्हा
                            ०६/०३/२०१६

देखते देखत सब खेल नदागे

देखते देखत सब खेल नदागे

मन करथे फेर लइका हो जातेंव
सब लइकन संग खेले ल पातेंव 
गिल्ली डण्डा , पच गण्डा अउ  डण्डा कोलाल
फेर का पुछथस रेसटीप , नदी पहाड़ संग छु छुवाल
मन मोर तभो भरे निही नोनी संग खेल परथंव इत्तुल बित्तुल चाम चटिया गुरजी मरगे उठा खटिया
तिरिचउक , सांप सिढ़ही अउ गोटा बिनाल
परगे पारी अटकन चटकन दही चटाका 
नवा नवा सिखेन रे भइया मार पिट्ठूल कुदउला 
खेल खेल म पोसंम पा , घानी मुनि अउ लंगडी
थक हार के घर जातेन घर म दाई खेलावय लाखडी, तिवरा राहेर चना दार टारबे डोकरी राहटा ल गाड़ा आवथे 
थोकुन बड़ का होगेन रे भइया खेलेन भंवरा बांटी चिभ्भी तुकाल 
अतको म नइ त ढेलवा रहचुल , घर घुंदिया त कभु खेलन दस गोटिया , नव  गोटिया अउ बघवा घेराल 
गली गली घुम घुम के खेलेन फोटो , चक्का चलइ , त  पथरा फेकाल
सुरता आथे कका दाई के किसा डारा पतेरा त मखना तुमा 
फेर का कहंव ग कइसन जुग ह आवत हे
देखते देखत संगवारी जम्मो जिनिस ह नदावत हे 
अब के लइकन के बात निराला 
बिडियो गेम कम्पोटर यहा मोबाइल वाला
खेल नदागे गुडडी गुडडा 
आगे नवा जमाना म टेडी संग डोरेमान अउ छोटा भीम 
छोटकुन लइका के टु हु नदागे 
का य करन संगी छोटकन तन गंवागे 
देखते देखत सब खेल नदागे
मन के बात मन रहि जाथे 
काबर बड़ तन पागेन |

           सुखन जोगी 
                   डोड़की  ,बिल्हा