जागो - जागो
सोयों को जगाने आया हूं
क्रांति की मशाल लेकर
सतनाम की जोत जलाने आया हूं
दुसरों की आदर कब तलक
अपनो की निरादर कब तलक
जगाता रहूंगा सोये हो तब तलक
पुकारता रहूंगा सुनोगे नही तब तलक
दुसरों की बात मानते हो
अपनों की नहीं
दुसरों की इतिहास जानते हो
अपनों की नहीं
चलो - चलो
मैं चलाने आया हूं
सतनाम का झण्डा लेकर
आगे - आगे जाने आया हूं
तुम्हें आग चाहिये
मैं चिंगारी लाया हूं
तुम्हें ठण्डी बयार चाहिये
मैं तुफान लाया हूं
तुम्हें सुख चाहिये
मैं मुश्कान लाया हूं
मुठ्ठी में भर के
जीने का अरमान लाया हूं
जागो - जागो
विद्रोही तान लाया हूं
अपना हक लेने का
सामान लाया हूं
प्रसुप्त ज्वालामुखी में
उदगार लाया हू
सोये इन मुरदों मे
भरने फिर वही जान लाया हूं
सतनामियों की शान लाया हूं
अपनों का अभिमान लाया हूं
गौर से देखो अब
सतनाम धर्म सास्वत गान लाया हूं
जागो -जागो
सतनाम विधान लाया हूं
पुनः बाबा जी का
मैं बखान लाया हूं
सुखन जोगी
डोड़की , बिल्हा
०६/०३/२०१६
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