Tuesday, 22 March 2016

हद हो गई

हद हो गई -हद हो गई
चोरों की बड़ी कद हो गई
धन दौलत तो चुराते ही थे
अब कविता चुराने लगे हैं
कवियों के सामने ही 
वो अपना बताने लगे हैं

गंगा को गोदावरी बताने लगे हैं
सरस्वती से बहती सविता चुराने लगे हैं
कवि ग्रुपों मे वो आते हैं
खुद को वो कवि ही बताते हैं
किसी की अच्छी कविता जब ये पाते हैं
कॉपी पेस्ट कर फौरन कहीं और चिपकाते हैं

कट कॉपी पेस्ट का जमाना है 
चोर बड़ा सातिर सयाना है
हमको लग गई है भनक 
उसको नही ये बताना है
चोरी की जब करे वो पोस्ट
शब्दों की डण्डे मार भगाना है

                         जोगी जी....

No comments:

Post a Comment