चल मेरे मन
तु कहीं चल
खुली वादियों में
जरा सा निकल
आसमाँ के तले
सागर नीले नीले
पर्वत झाड़ी
घोड़ा गाड़ी
सैर को निकल
चल मेरे मन
तु कहीं चल
ठण्डी हवायें
बाहें ये फैलाकर
मुझे बुलाये
संदेशा लाये
याद किया है तुझे
मुझे बताये
यै मेरे मन
चल तु चल
सुरज ने भी
किया ईसारा
निकल गया
दिन ये सारा
क्यो बैठा रहा
बनके बेचारा
या तु भी हो गया
मन का मारा
चल मेरे मन
तु कहीं चल
"जोगी जी"
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