Tuesday, 1 March 2016

किस्सा के मरम

गांव म बर के रूख तरी जम्मो सियनहा मन जुरियाय रहिन जेमा दुकलहा , मंगलू ,  इतवारी , ढलगन अउ जेठु घलाव रहिस सबो झिन गोठियात रहिन गोठ के बिसे रहिस किसा , काबर के किसा ह हमर पुरखा पाहरो ले चले आत हे ! सब अपन अपन बिचार ल रखिन ! 
दुकलहा- देखव ग किसा अइसे जिनिस ये जेखर ले हम सिच्छा- दिच्छा पाथन अउ उही सिच्छा ले तहां हम अपन अवइया पिढही ल बरो देथन जेकर ले उमन  अपन जिनगी  ल जियत ,  सुधारे के परयास करथें जइसे हमन करे हन!
ढलगन- देखव भाई मोर तो अतकेच कहना हे किसा ह हमर  मन बहलाय के  जिनिस आय जइसे चुटकुला जनउला हर हसी ठट्ठा के जिनिस ए !
मंगलु- बात अईसे नोहे भइ  किसा हमर पुरखा राज ले चले आत हे ये ह हमर पुरखा मनके जिये जिनगी ए जेन ल हमन किसा कहत हन !
ईतवारी-  मोरो गोठ ल सुन लव ग मोर बिचार कथे ये किसा ह रिसी मूनि मन के लिखे ये जेखर ले ये मन सिच्छा देहे के काम करथें फेर संसकिरित म कइथें जेखर ले हमन नी समझ पावन!
इही बेरा म घांसी घलो आ घलीस आवत देखके तिर म बलाइन !
घांसी- का गोठ चलत हे ग त महु ल हूत करथवव..
जेठू हर सबो के बिरतांत ल आरी पारी घांसी ल सुनाइस! 
घांसी - जेठु कका ! ते ह ये मेर हमर सबो ले सियनहा आस , तोरो का बिचार हे बता डर ग...
जेठु- देखव ग उम्मर ह तन ल सियनहा करथे मन ल नई, मे तो अढहा हंव मोर बिचार ह नइ जमत हे, अब तिहीं कुछु बता घांसी..
घांसी- मे तुहंर सब ले छोटे आंव फेर आपन सियान मन ल मे का बताहूं तभोले एक ठन गोठ करे चाहत हंव .....
कहि न ग... दुकलहा ह कहिस! 
घांसी- किसा ह हमर देस राज के बिसेसता आय ! इही हमर सिच्छा , संसकिरति के अधार ए, ये ह पुरखा ले चले आत हे , तुमन जानथव आज हमला पढ़हे लिखे के हक नइ ए ! आज हमर लईकन के भभिस गढ़हे के अधार नइ ए, आज हमर देस म हमर राज नइ रइगे हे जेखर ले हम लचार हो गे हवन! 
इही सब ल देख के परख के हमर पुरखा मन अपन जिनगी ल सुघर जिये बर , अपन लइकन म सिच्छा के संचार बर, सिच्छा - दिच्छा गियान बर ये किसा के मरम ल बताइन अउ किसा के रिति ल चलाइन!
हमर पुरखा ह हमर भभिस बर बड़ दुख झेलिन नाना परकार ले कस्ट सहिन , किसिम किसिम के बिचार करिन गुनिन हरिन तब जाके ये किसा कहिनी जनऊला चुटकुला ह आइस फेर धीरे धीरे लइकन ल सुनाय के सिखाय के परकिरिया ल अपनइन जेखर ले उनमन अपन लइका के मति के बिकास करिन भल आदमी कइसन होथंय , कपटी मनखे मन कइसन होथें ये खर मरम ल इही किसा अउ जनऊला के माधियम ले बताइन ! 
येखरे सेति ये हा हमर देस के बिसेसता ए !
फेर घांसी हमर देस के सिच्छा नीति के गियान ल तो नी पायेन -- मंगलु ह कहिस
घांसी - कइसे कइथस मंगलु, चुटकुला जनऊला फेर हाना के गोठबात म हमन गनित के जोड़ , घटा, अद्धा , पऊना, गिनती, बिसकुट्टा ल सिखबे करथन जी, अउ किस्सा कहिनी ले जिये के सलिका , सोंच समझ गियान घलाव ल पाथन ! हां फेर ये अलगे बात ये के लिखे पढ़हे ल नइ सिख पायेन,  मोर ये बिसबांस हे के पुरखा के तियाग , तपसिया , परयास ह बेअरथ नइ होय ग!
आज हमला इही मेर परन करना चाही के हम ये सबो जिनिस ले अपन लईका मन ल सिखाबो जिये के सलिका बताबो येकरे सहारा म अपन लइका मन ल अपन हक बर लड़े ल सिखाबो , ऊंखर मति के बिकास करबो ! किस्सा अउ कहिनी के सहारा म सिच्छा के इसतर ल बढहाबो का होही गर हमर लइका आज इसकुल नइ जा सकत हे येखरे माधियम ले हमन अपन लइका मन ल पढहाबो जेखर ले भभिस म हमर लइकन मन इसकूल जा सकय, पढ़ सकय!
जेठू- सही केहे घांसी तेहर ,किसा के मरम ल तहीं ह सिरतोन जाने हस ! 
आज हमन सबो ये परन करत हन के हमर देस म ये किसा , कह्नी जनऊला, हाना अउ चुटकुला ल जुग जुग ले जियावत रहिबो , अपन खुन पसिना के पानी पियावत रहिबो , जेखर ले हमर भभिस बनही अइसन पुरखा के बाना ल भाखा ल लमावत रहिबो , किसा ल बगरावत रहिबो, नवा लइकन ल सिखावत रहिबो, परन हे- परन हे !
सबो झन एक संग कहे लगिन -
परन हे - परन हे- परन हे हां परन हे......

सुबिचार:- 
               * बिचार करान्ति के अधार होथे चलगे त दुधारी तलवार होथे *

           कहिनी कार --  सुखन जोगी
                         डोड़की ( बिल्हा )

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