Tuesday, 1 March 2016

सुन्ता के जरी धिरज आय

बबा घांसी असनाद खोर के मलागिर चंदन लगाके बढ़िया सादा- सादा धोती बंगाली पहिर के बेटी सहोदरा के ससुरार जाय बर पदजात्रा करत निकलीस दस कोस के जात्रा के बाद एक ठन गांव के बस्ती म पहुंचीस बीच बस्ती म बड़ झन आदमी जुरियाय रहिन जेमेर कुछ आदमी झगरा होत रहिन फेर कोनो सांति करे के परयास नई करे अउ टुकुर टुकुर देखत बस रहिन थोकिन रूक के बबा ह सब हाल ल देखिस देखे के बाद बबा ह तिर म गइस बबा के बेस-भूसा ल देख के सब देखइया मन परनाम करिन  बबा सब ल आसिस देके झगरा होवइया मन ल पुछिस - कइसे भइ तुमन काबर झगरा होवत हव  ! 
झगरा होवइया मन बबा ल देखके सांत होगे फेर एक झन ह कहिस - बबा ते हमर झगरा म मत पर ते परदेसिया आस ते कुछु ल नइ जानस !
बबा मुस्कुरा के कहिस - परदेसिया तो तहुं हरस जी .....
ओ आदमी फेर कहिस - बबा ते कइसे कहिथस परदेसिया मे ह , मोर तो ए ह घर आय!
बबा- हांसे लगिस फेर कहिस, देख जइसे मे तुंहर बर परदेसिया आव , थोर समे म मे चल दुहूं ओइसने ये दुनिया म तहूं परदेसिया आस  ! कुछ समे म तहूं चल देबे फेर ये धरती ह तो कहुच नइ जाय ! 
दुसर मनखे ह कहिस - देख बबा हमर झगरा म तोर काय काम फेर तैं काय कहना चाहत हस ...?
बबा- मोर काय काम.....? फेर मे पुछना चाहत हंव ये झगरा म काय मिलही अउ ये झगरा काय जिनिस के ए....?
एक माइलोगिन तिर म बइठे मुडी धरे रोवत रहिस तेहर कहिस - बबा ये दुनो झिन मोर बेटा ए , झगरा जगा के बटवारा बर होत रहिन , मे बटवारा कर देंव त ए मन ये मंदिर बर अउ मोला रखे बर झगरा होवत हें ! 
एक ह कथे मंदिर म मे तोला आवन नइ दंव फेर दाई ल तें ह रखबे त दुसर ह कथे मंदिर ह मोर ए मे बनाय हंव येमा तोला घुसरन नई दंव अउ रहि बात दाई के त तोला रखेच ल परही मे नइ रखव.....
बबा.. मोर तो मरना होगे जिनगी भर कमा कमा के नान्हे ल बड़े करेंव , जिनगी भर के तपसिया मोर बिफल परगे सियनहा के रहत ले सुख म रहेंव जाने अब का होही ...... इही रोना ल मेहा रोवत हंव  !
बबा - सुनव भाई हो .. मोर गोठ ल सुनहु त मे कुछ कहना चाहत हंव जेखर ले तुहंर समसिया के निदान तुरते हो जही....
दुनो झिन एके संग कहिन - का बात हे बता..?
बबा- " सुनता के जरी धिरज आय " अगर धिरज धरके सुनहू त सुनता ह माढ़ जाही !
मोर एक ठन गोठ के जवाब ल बतावव....?
दुनो भाई- काजित ल....?
बबा- तुहंर सियनहा ह बिदीस त का लेके गिस हे....? का रूपिया -पइसा , धन -दउलत , जगा-भूम ल लेके गिस या फिर का करिस बतावव..
दुनो भाई के मुह ले जवाब नइ निकलीस..
बबा- अउ रही बात मंदिर के त तें कइथस आन नइ दंव त ओ कइथे जान नइ दंव, फेर ओ भगवान ह कोनो ल मना नी करे के तें मोर पुजा मत कर , हम तो अपन आस्था दिखाय बर पुजा करथन ! 
सउहत दाई ददा जेहर भगवान के बरोबर होथे ओखर हम सुबे साम चरन पखारे नई सकत हन अउ ए मंदिर म रखे पखरा के देंवता के पुजा करे बर झगरा होवत हन कहां ले सही हे बतावव...
ये महतारी ह तुहर ननपन म कतेक सुघ्घर तुहर जतन करिस , तुहर नान - नान खुसी बर मेहनत कर तपसिया कर के पुरा करिस फेर ओला आज का मिलिस का इही सोंचे रहिस ओ महतारी ह काली मोर बेटा मन बड़े होके मोला रखे बर झगरा होंही ...
महतारी तो ओ रूखवा के समान होथे जेन ह सब ल छांय देथे चिरई चिरगुन, पसु पच्छी , जीव जंतु सबो ल फेर कोनो ले नी कहय ते जा मे तोला छांव नइ दंव अउ फर लगे म फर घलो देथे हमर खाय बर फेर कुछु नी मांगे  ओसनहे महतारी होथे अपन कोनो लइका म भेद भाव नी करे एके समान मया देथे! 
येखरे सेति कहे गेहे .. " जग भर ल दे छांय उही रूखवा बर आय "  जइसे बर के रूखवा ह अपन अकार ल बडे करके बड़ दुरिहा ले छाथे जेमा अवइया जवइया राहगीर मन ल छाव देके काम करथे जेमा ओखर कोनो सुवारथ नी रहय ओसनहे महतारी के दुनिया ओखर लइके हर होथे अपन लइका बर ओ ह अपन दिन रात ल पहा देथे , ओकर जरुवत पुरा करे बर अपन जिनगी खपा देथे !
मे पुछथंव का दे हव तुमन अपन महतारी ल , का सुख पाय हे , तुही मन बतावव...?

दुनो भाई के आँखी ले आँसु बोहाय लागीस , बबा ले माफी मांगे लगिन- हमला छमा कर दे बबा हम सुवारथ म अंधरा होगे रहेन , हम दाई ददा के तियाग तपसिया ल नइ समझ सकेन!
महतारी के ममता ल नई जानेन अउ ओखर बांटा करे ल भिड़गेन ....
बबा-  तुमन मोर से माफी झन मांगव माफी मांगना हे त अपन महतारी से ओ माता से मांगव जेखर तुमन गुनेगार हव , ओ छमा कर दीस त सगरी दुनिया छमा कर दीस ..
अतका ल सुन के दुनो भाई अपन दाई के पांव तरी गिरगें अउ रो रो के छमा मांगे  लगिन ... फेर मां तो सच म महान होथे ओ ह छिन म छमा कर दीस..!
दुनो भाई जम्मो झगरा ल भुला के गला मिलीन अउ महतारी ल उठा के दुनो झिन बांह ल धरे घर भितरी चल दीन.....
बबा अपन गंतब्य राह म आगु बढ़गे.......

सुबिचार-
                * राह चलत म जिनगी के सिख हे पता नइ चले कब कहां मिल जही  *

                कहिनीकार- सुखन जोगी
                       डोड़की    ( बिल्हा )

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