लतेल अउ सतेल दुनो भाई बबा मेर जाय बर घर ले निकलथें थोकन दुरिहा म जाके सतेल ह कइथे -भाई लतेल ते राजू ल बला अउ मेहा सोनू ल बलाके लानथव ओ समारू बबा के घर तिर भेट करबो फेर बबा करा किसा सुने चलबो !
लतेल - ठिक हे भइया !
समारू के घर मेर सबो के भेट होथे
राजू- ते बने करे भाई मोला बलाके लाये फेर मे तो भुलइ गे रेहेव, ले चलव बबा मेर चलीं!
सबो झिन एके साथ कहिन- चलव चलव चलिन अब !
बबा मेर पहुच घलीन बबा देखते ही कहे लगीस- मे जानथंव तुमन कइसे आय हव , तुहर काली के किसा ह बाचे हे ....
सोनू -हव बबा उही ल सुने बर आय हवन!
बबा- तुमन अपन निस्ठा ल रखेव त मोरो फरज बनथे कि मे अपन भाखा के मान रखव , मे तुमन ल किसा जरूर सुनाहूं!
फेर मे कोन मेर रेहेव....... बबा ह जानके पुछीस!
लतेल- बबा किसा ह तो पुरगे रहिस फेर हमन झगरा ह ओखी के खोखी होथे ल पुछे रहेन , तिही ल बता कइसे होथे ?
बबा - हां....सिरतोन कहे....
" मन के बैइर ह बैईरी ल खाथे " एला पहिली जानव तहां ले ओखर मरम ल खुदे जान जाहु!
राजू - ओ कइसे बबा ?
बबा- ले मे बताथंव...
धियान लगाके सुनिहव..... जब कखरो बर हम बैर रखथन त ओ बैर के बसीभूत होके हम ओ मनखे के अहित करे के उदिम करत रहिथन ,इही परयास म हम अपन बिकास नइ कर सकन जेकर से हम अपन , अपन परवार के, घर बार के जतन ल करे छोड़के ये गुनत रहिथन कब मऊका मिलय त ओकर फजीहत करव!
अपन मन ल सफा रखे ले छोड़ मइल भरत रहिथन जेखर से हमर खुद के जिनगी घलो ह परभाबित होथे ! येखर सऊंहत परछो मे बतावत हंव अंते कहां जाबो अपने गांवे म देख ले ओ.. रमेसर ल जोऊन मंगलू बर बैईर करके मंगलू ल खरी खोटी सुना डारिस मंद मऊहा ल पिके फेर गांव के सबो झिन रमेसरे ल लताड़ दिन त का रहिगे रमेसर के गांव के आघु म ओखरे तो फजिहत होइस न...
सिहतोन केहे बबा मे रहेव ओ दिना.. सोनू ह कहिस !
बबा - देखव भइ ये गोठ ल कखरो मेर झिन कइहव, येखर ले बदनामी ह बढथे!
मे तुमन ल समझाय बर बताय हंव ! अतका जान लव ये ल बाहिर म कईहू त रमेसर के नइ तुमन मोर बदनामी करहू !
लतेल - नइ कहन बबा .. फेर अईसे कइसे होही ?
बबा- देखव भइ ... अइसे कइसे होही के घलो जवाब हे , आज मे तुमन ल कहे हंव काली तुमन बाहिर म कइहू गोठ बात बढ़ही , तिल के ह ताड़ अउ राइ के ह पहाड़ बनही तहां ले नियाव होही , नियाव म कोन कहिस पुछे जाही जेमा तुमन मोर नाव बताहव जिहां गांव भर मोला बद्दी देहे आहीं घांसी ते लइका मन ल किसा के बहाना म उटपटांग सिखावत हस त.. मोर तो बदनामी होगे न जी....
सबो एके संग कहिन - हव.. हव.. नई कहन बबा...!
अब देखव तुमन खुदे गुनव रमेसर ल का मिलिस..... ? कोनो बता सकत हव....?
मे बताव बबा - सतेल ह कहिस !
बबा - ह ते बता..!
सतेल- गांव भर म बदनामी होइस जेखर ले ओखर मान ह लोगन के नजर म कमतिया गे..!,
बबा - ठिक कहे तेहां, काबर के बैइर ह बैइरी के संग म हमु ल खा देथे जेखर ले हम गलत संगती म पड़ जाथन तिहां ले गलत करम करे लगथन फेर का हे दुसर के बिगाड़ करत करत हम अपने बिगाड़ कर डरथन , फेर हमर आँखी नी खुले मुंदाय के मुंदाय रहिथे जइसे मंगलू ह रमेसर ल जुआ चित्ती अउ दारू ल छोड़े बर कहिस त रमेसर ह ओखरे बर भड़क गे....
अब तुमन का समझेव तेला बतावव......!
मे बताव बबा-- सोनु कहिस
बबा - ले बता...!
सोनु - बबा हम जान डरेन "" बैइर ह बैइरी ल खाथे "" ओसनहे हे जईसे "" झगरा ओखी के खोखी होथे "" जइसे हम दुसर बर बैर रखथन त हमरो जिनगी परभाबित होथे ओइसनेहे झगरा म घलो हमर खुदे के जिनगी ह परभाबित होही, हमर खुद के बिगाड़ होही ! काली महु ह रमेस मेर झगरा होय रहेव जेखर ले मोर दाई अउ ओकर दाई खुब झगरा होय रहिन , अब मे समझेव मोर दाई काबर कहत रहिस "एक झन लइका गली भर ढिंढोरा पिटाथे" , ते कोखरो मेर झगरा मत करे कर!
मे आज के बाद कखरो मेर झगरा नी करंव!
हव... हव ..हमु मन समझगेन अब हमु मन झगरा नि होवन.. सबो झन कहिन!
ले जावव त मोर किसा ह पुरगे..... बबा ह कहिस !
सुबिचार :-
* हर महान मनखे के जिनगी ह पहिली सधारन होथे *
कहिनीकार- सुखन जोगी
डोड़की ( बिल्हा )
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