छत्तीसगढ़िया जब्बर परबुधिया
सब कहे छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
मधु कहे छत्तीसगढ़िया जब्बर परबुधिया
काट काट हम खाथन कुसियारी ल
सेहराथन जी अपन हुंसियारी ल
नई दिखय हमला दुनिया दारी
करथन जी हम काम बेगारी .....१
सब कहे छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
मधु कहे छत्तीसगढ़िया जब्बर परबुधिया
खोल के देखव आंखी के दुआर
कोन करत हे तुंहर राज म बेयपार
भेल , गुपचुप ,चाट के लगे ठेला
जघा नई पावव मढ़ई , बजार अउ मेला.....२
सब कहे छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
मधु कहे छत्तीसगढ़िया जब्बर परबुधिया
जुरमिल के रहईया भुलायेव ऊंखर बात म
झगरा होथव आज ऊंच- नीच जात पात म
मिलगेव रे भईया लबरा के सांठ- गांठ म
अईसने करके सेंध मारिन तुंहर राज- पाठ म........३
सब कहे छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
मधु कहे छत्तीसगढ़िया जब्बर परबुधिया
जघा-जघा कम्पनी लगत हे
जेमा बाहरी आदमी भरत हे
बेलन, गाड़ी, दऊरी ह नंदागे
एक फोन म हारवेस्टर ह आगे.......४
राज भाखा बनगे छत्तीसगढ़िया
तभो पढ़े लिखे नई पायेव रे परबुधिया
खुर्सी म बईठ अपन भाखा पढ़हाये बर
जोर लगावत हे आज ऊड़िया
तभो कईथंव छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया
ले महूं कहथंव छत्तीसगढ़िया सिरतोन परबुधिया...........५
यह कविता मधुराज को समर्पित.......
" सुखन जोगी "
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