कह रही धरती माता ,अपने रणबांकुरों से| बचा लो मेरी लाज ,अपने घर के ही गद्दारों से|| फटेगा गुम्बर अब , निकलेंगे दिवारों से| सीना चिर देंगे उनका, अपने हाथों की औजारों से||
No comments:
Post a Comment