Thursday, 14 January 2016

तेरी बेरूखी

कसम से तेरी ये बेरुखी, मैं न सह पऊंगा ! 
होके जुदा तुझसे , कैसे अब रह पाऊंगा !!
तेरी बेरुखी ईक दिन , मेरी जान लेके जायेगी !
वहां भी मुझे तु ही, बस तु ही याद आयेगी !!
काफ़िलें बड़ते गये, राह बदलते गये !
पर तेरी वफ़ा की बातें , ज़हन से मिट न पाये !!
जोग धारण कर लिया , जोगी तेरे प्यार में !
दर - दर भडकता रहा , तेरे इक दिद़ार में  !!
गज़लें गाता रहा , तेरी जफ़ा की !
हर शब्द में थी , बातें वफ़ा की !!
उल्झा गई मुझे , तेरी ये बेरुखी !
अब कुछ तो बोल , सहा न जाये ये खामोशी !!
बन के बैठा रहा जोगी , तेरी ही द्वार पर !
बे- पलक देखता रहा , उस झूठी आस पर !!
मार गई मुझे बेरुखी , तेरे नैनों की कटार पर !
सांस न भर सका जोगी , एक ही वार पर  !!

                जोगी

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