अंडे की सीलवट को तोड़कर
निकली अभी अभी एक नन्ही चिड़िया
उसके पास एक वैसी ही चिड़िया
बिलकुल उसी के जैसी
निसंदेह उसी की मां थी
वो झट से उड़ी लाई चंद दाने खिलाने को
खिलाकर अपनी सारी ममता लुटा दी उस पर
शरीर ने जब थोड़ा आकार लिया
वो उड़ने को तत्पर हो चली
प्रयास करने लगी
क्रिया देख मां ने दी प्रतिक्रिया
सामने लगी उछलने पैरों के बल
यह देख छोटी चिड़िया चल पड़ी आसान करने उछल पड़ी
लिडंबना थी बड़ी एक पैर मे हुई खड़ी
यह देख बच्ची विकलांग निकली
मां के मन से चिख निकली
साहस कर सिखाने लगी उड़ान
कहने लगी बना लो अपनी खुद की पहचान
हौसला भर वो एक पैर मे कुदने लगी
चंद रोज मे मां ने उसे उस भीड़ मे ला खड़ा किया
जिसे कहते हैं लोग दुनिया
यह देख छोटी चिड़िया हतास हुई
झट मां को ये आभास हुई
मां ने कहा मत कर अफसोंस उसका जो तेरा साथ नही
कमजोर वो अंग है जो तेरा हाथ नही
क्यों करती है परवाह गैरों का
फिर अफसोंस क्यों इन पैरों का
पैर नही क्या हुआ पर तो हैं
आज आस्मा तेरी उड़ ले तु
मन मे हिम्मत की सांस भरी
पल मे उड़ गई मेरी नन्ही परी.....
सुखन प्रसाद "जोगी जी"
मो. 8717918364
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