Sunday, 24 January 2016

नन्ही चिड़िया

अंडे की सीलवट को तोड़कर
निकली अभी अभी एक नन्ही चिड़िया
उसके पास एक वैसी ही चिड़िया 
बिलकुल उसी के जैसी
निसंदेह उसी की मां थी
वो झट से उड़ी लाई चंद दाने खिलाने को
खिलाकर अपनी सारी ममता लुटा दी उस पर
शरीर ने जब थोड़ा आकार लिया
वो उड़ने को तत्पर हो चली
प्रयास करने लगी 
क्रिया देख मां ने दी प्रतिक्रिया
सामने लगी उछलने पैरों के बल
यह देख छोटी चिड़िया चल पड़ी आसान करने उछल पड़ी
लिडंबना थी बड़ी एक पैर  मे हुई खड़ी
यह देख बच्ची विकलांग निकली
मां के मन से चिख निकली
साहस कर  सिखाने  लगी उड़ान 
कहने लगी बना  लो अपनी खुद की पहचान
हौसला भर वो एक पैर मे कुदने लगी
चंद रोज मे मां ने उसे उस भीड़ मे ला खड़ा किया 
जिसे कहते हैं लोग दुनिया
यह देख छोटी चिड़िया हतास हुई 
झट मां को ये आभास हुई
मां ने कहा  मत कर अफसोंस उसका जो तेरा साथ नही
कमजोर वो अंग है  जो तेरा हाथ नही
क्यों करती है परवाह गैरों का 
फिर अफसोंस क्यों इन पैरों का
पैर नही क्या हुआ पर तो हैं
आज आस्मा तेरी उड़ ले तु
मन मे हिम्मत की सांस भरी
पल मे उड़ गई मेरी नन्ही परी.....

          सुखन प्रसाद "जोगी जी"
       मो. 8717918364

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