Sunday, 31 January 2016

परभुता अउ माटी के कूता

संझा के बेरा घांसी बबा ह अंगना म मचोलिया म बईठे रहय बड़ सुघ्घर भजन गावत रहिस-
पुरखा के बाना नई टोरव मैहा न
धरे सत के रद्दा ल नई छोड़व मैहा न.....
का रखे हे परभुता म
सब जाही संगी माटी के कूता म....
पुरखा के....
ठउके समे म सोनु , राजु , लतेल अउ सतेल दुनो भाई आईन  बबा के तिर म आके पाव परथन बबा कहिके ,कहे लगिन -
बबा बड़ दिन होगे एको ठन किस्सा नि सुनाय हस येदे हम किसा सुने आय हवन |
बबा - अच्छा.. त तुमन किस्सा सुनहु ले चलव भई बईठव त..
मे तुमन ल किसा सुनात हंव
बबा अभी ते का गावत रेहे ग राजु ह पुछीस !
बबा -  मेहा बेटा !...भजन गावत रहेव |
परभुता अउ माटी के कुता का ए बबा सतेल ह पुछ लीस |
बबा - हास के कहिस अभी तुमन लईका हव , फेर मे तुमन ल बताहू | परभुता अउ माटी के कूता का ए | 
सुनव... 
परभुता- ए ह आदमी ल आदमी कर लड़वा देथे अउ आदमी से आदमी ल जोर घलो देथे, झगरा ओखी के खोखी होथे | 
लतेल - बबा ऐ ह आदमी ल आदमी करा लड़वा  देथे फेर जोर घलाव देथे कईथस कईसे ...?
बबा - बतावत हंव...
आदमी अपन परभुता लाय बर , अपन जोर चलाथे, हर समे मोर चलय कहिथे अउ चलाय के परयास करथे जेकर ले कईयो आदमी ओखर बईरी हो जथे फेर कतको ओखर संग घलाव धरथें जईसे कऊनो परिवार म सियनहा हर कमा कमा के रूपिया पईसा जोर जोर के घर बार बनाथे फेर जब ओखर लईका के सियानी आथे त ओ लईका ह दारू मंद जुआ चित्ती म भुला के खेत खार ल बेच भांज डरथे त गांव के मन कहिथे सियनहा हर अपन परभुता म कतका सुघ्घर जगा भूम ल बनाय रहिस फेर ए लईका हर मेट डारिस|
येकर सऊहत उदाहरन हे  हमर देस म एक झन पठान राजा रहिस जेकर नाव बादसाह अकबर रहिस ओ ह दुनिया भर लड़ाई लड़ के जीतीस अउ पुरा भारत देस म एक छत राज करिस | 
फेर ओकरे बंस म औरंगजेब होईस जेन हर अपन बाप अउ अपन भाई ल मार के अपन परभुता लाईस | अपने बंस के नास कर दिस |
अब ते जान डरे परभुता बनाथे घलो फेर बिगाड़थे घलो ....
बबा परभुता ल तो जान डरेन फेर ए माटी के कूता का होथे- सोनु हर कहिस|
बबा - अब मे तुमन ल माटी के कूता ल बतावत हंव | 
माटी के कूता ओईसने होथे जईसे गऊटिया मन किसान करा अपन खेत ल बोय बर कुता दे देथे , अतका कन मोला ते कमा के देबे उपरहा हर तोर ए तइसे 
माटी के कूता हर आय | 
एक दुसर के मुह ल देख के लतेल हर कहिस - बबा कुछु समझ म नई आईस | 
बबा - मे समझात हंव ...
जईसे किसान हर गऊटिया ल कमा के दिस तईसे हमन ल अपन जिनगी म सुघ्घर करम के बुता ल करत पहाना चाही , चोरी चकारी,  मारा मारी , झुठ लबारी अउ हिंसा ल तियाग के सही करम ल कर के जिनगी बिताना चाही | धन दऊलत जिनगी के जरूवत आय ओ ह संग म नि जाय , आदमी कतको कमा ले रूपिया पईसा जोर लय फेर संग म नई ले जा सकय ले जा सकत हे त बस मान सनमान अउ नाव ल जेन ल ओ ह भल करम कर के कमाय रथे | 
मरे के बाद सब ल एक दिन ए माटी म मिल जाना हे | ईही ह माटी के कूता ए..
समझ म आईस ग.... सबो झन ल | 
सबो झन एक साथ कहिन - हव बबा ! 
ए जिनगी ह हमला कूता म मिले हे जियत ले सही करम करबो अउ येकर फल मरे के बेरा मान सनमान के रूप म मिलही फेर बाकी हर ओ गऊटिया के ए जेन हर हमला ए जिनगी ल देहे हे |
राजू- बबा ए ओखी के खोखी का हरे ..
बबा - काली बताहु रात ह बड़ होगे हे जावव सुतव |

         कहिनीकार-   सुखन जोगी
          ग्राम -    डोड़की ( बिल्हा )
                        बिलासपुर ,छ.ग.

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