मै बुराइयों का भंडार हुँ
ढूँढ सको तो मुझमे अच्छाई ढूँढो
अच्छाई मिले तो मै स्वर्ग हुँ
बुराई मिले तो नर्क का द्वार
माँ की ममता हू तो कहीं पिता की फटकार
बडो का सम्मान हू तो कहीं मै तिरस्कार
कहीं चिन्तन की पराकस्ठा हुँ
तो कहीं मै प्रथम हूँ विचार |
नव यौवन की लज्जा हूँ
कहीं युवा का अभिमान
आज वृद्ध का स्वाभिमान हूँ
तो कल था मै बालक नादान |
मानुष मे है मेरा वास
अमानुष मे नही करता प्रवास
मुखरित होता हुँ कभी सुविचार
तो कभी कटाक्षीय परिहास |
दिल को जीत लेता हूँ बनके उपकार
तो कहीं अभिवादन मे प्रतिहार
समझो मुझे मुलत: जीवन सार
हूँ मैं मानुष विचार ||"
" रचनाकार "
सुखन जोगी
ग्राम-डोडकी
मो. नं. 8717918364
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