Saturday, 23 January 2016

" मैं "

हर जगह लगी होड़ है ,
मै  की जहां दौड़ है|
मुझे सब कुछ पाना है,
मै की ये कारनामा है||

मै समझौता नही करता, 
मै किसी से नही डरता|
मै पे मै ही करता भरोषा, 
मै नही रोपण करता दोषा||

मै कहता लाजवाब हूं,
मै आफताब हूं|
जो करता हू,
एकदम सही करता हूं ||

मै मे छुपा मान,
मै ही करता अपमान|
मै ही लगने देता दोष,
मै ही करता अफसोंस||

मै ही गिराता ,
मै ही उठाता|
मै ही बिगाड़ूं,
मै ही बनाऊं||

मै बात बनाऊं ,
तो मै बिगाडूं भी|
मै अपना बनाऊं,
तो मै लडाऊं भी||

मै ही जोग कराता,
मै ही भोग कराता|
मै ही निर्माता,
मै ही भग्यविधाता||

मै की दौड़ मे कोई नही आगे,
दौड़ मे केवल मै ही भागे|
मै मन मे साजा,
मै ही मन का राजा||

मै राज्य व्यापित,
मै देश निष्कासित|
मै व्यथित -मै पतित,
मै लज्जित- मै गर्वित||

मै ही नाश मै ही विनाश,
मै ही करता सत्यानाश|
मै ही रास मै ही सांस,
मै ही आस मै ही अंधविस्वांस||

मै मानुष मै भगवान,
मै गरीब मै धनवान|
मै प्रकाश मै आभास,
मै अगोचर अनंत आकाश||

                "जोगी जी"

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