Monday, 18 January 2016

सतनामी कहे पुकार के

सतनामी कहे पुकार के!
हिम्मत है तो आजा ललकार के!!
वतन की जजबा हम में भी!
उखाड़ देंगे दूश्मनों के खम्भे भी!!
मत भूल औरंगजेब को ललकारा था!
दो दो बार फटकारा था!!
घाती हम में ही था तभी तो खायी मात!
वरना हम से लड़े गैरों की क्या औकात!!
अक्सर ये देखने मे आते हैं!
दुश्मन देख हमको घबराते हैं!!
हौसला हम मे है मस्त!
बैरी हमको देख हो जाते हैं पस्त!!
देखा नही क्या तुने विरता की मूरत !
साक्षात राजा बाबा की सूरत !!

             जोगी , 
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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