अब तो हर घर म लगत हे
लोगन के बारी म सजत हे
पुछे म कहिथे,
घर के रखवारी करत हे
भईगे ईही बात ऐ,
घर घर म बेसरम उगत हे |
बेसरम हंसथे खेलथे फुलथे फरथे
जमाना के परवाह नी करे
जम के लड़थे आघु बड़थे
जब घर के मन नी कहे सके
इही ह कहिथे
घर के लाज बचाथे |
न रेहे के चिंता न खाऐ पिऐ के
जे मेर जाथे मिलथे ओला अनुकुल जिए के
इही ल कहिथे जिनगी के सामंजस
जेला ओ ह भली परकार ले जानथे
कोई जिये ले जाने चाहे झन जाने
कोई माने झन माने ओहा मानथे |
आज के जमाना ल कहिबे त
इही मन के राज हे
काबर के
ईखरे मन के सिर म ताज हे
अपने असन ल चट पहिचानथे
अउ झट संग म घुमावत हे
इही मन तो
गांव गांव के बेटा अउ देश के नेता कहावत हें |
कहिथें इंखर फूल ह बास नी करे
ऐहा दुसर के कुल के नाश करथे
रही जाथे त बस
ऐखर सत्ता
तभे तो हर जघा राज करत हें |
बिधाता घलो ह
ऐखरे मन के लाज रखथे
तभे तो
ईखर मन के सिर म ताज रखथे
ऐही सेती कहे गयहे
नाव के नही बाबू
ऐहा काम के बेसरम ऐ |
चऊक चौराहा परिया अउ खार म
बड़े बड़े बेसरम लगे आज बेयपार म
कहां खोजे ल जाबे
इही मन मिलथे
सबो कोती सनसार म |
ऐहा डेरावय नही कोनो ले
घलो रिसावय नही कोनो ले
मिठ मिठ गोठियाथे मधरस डारे सरी
कतको लतिया चटक जाथे गुर पागे सरी
तें नेवता दे फेर झन दे
हबर जाथे बेड़ा म जाने सरी |
होथे इंखर जघा जघा पुछाड़ी ह
केहे म इंखर निकल जाथे बड़े बड़े गाड़ी ह
अबूझ मन समझे ऐला सबुझ
करथे बड़ खातिरदारी ल
अउ गोड़ तरी गिर करत हे पयलागी ल |
सुखन जोगी
ग्राम - डोड़की, बिल्हा
मो.नं. 8717918364
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