Thursday, 14 January 2016

मेरे जज्बात

मेरे जज्बात 

जज्बात मेरे पल मे बदल जाते हैं
याद मे तेरे ये पीघल आते हैं
खुद को भुल कर तुझमे समा जाता हूं
जब जब आते जहन मे तेरी बातें हैं

तेरा हसना , तेरा वो मुस्कुराना
तेरा रूठना और वो तेरा मनाना
सब कुछ भाते थे "जोगी"
तेरा वो नखरे नाज उठाना

अदा भी तेरी क्या खूब थी
शरमाना और नजर झुकाना
बातों ही बातों मे कुछ और कह जाना
ये भी किया जोगिया-ऐ-सनम
कदमों मे तेरे जान बिछाना

तुझे रास न आई मेरी ये वफा
जो तु हो गई मुझसे इक पल मे खफा
कैसे समझाता जोगी तुझे
आती नही मुझे ये अदा

खुदा ने तकदीर मे ईतनी ही ईबादत लिखा
तभी तो तुमसे ईतनी ही मोहब्बत मिला
शुकरगुजार है "जोगी"उस खुदा का
जो इन हाथों मे तेरा हाथ लिखा

शिकवा नही तुझसे शिकायत भी नही
नही कह सकता के तुझसे मुहब्बत भी नही
सारे जहां ने दिया साथ "जोगी" का
जब तु साथ मे रही

फलक आज भी याद है मुझे तेरी बातें
के मर न जाऊं मै कही ईतना भी प्यार न कर मुझे
ये तो बाते हैं तेरे प्यार की
तब कहना था तुझे पर मरना है आज मुझे

क्या था कुशुर मेरा ये तो बता के जाती
थोड़ी सी करार दिल को तो आती
इक ईशारा ही तो कर दिया होता
बदले मे यू ही जान तो न जाती

दे जाता मै भी तुम्हे खुशियों की सौगात
कुछ और देने की मेरी क्या औकात
आबाद रहना जा मेरी महबूबा
दिल से दुआऐं देता हूं मै आज

   ®🚘  सुखन जोगी

No comments:

Post a Comment