Sunday, 24 January 2016

खदर के बगल मे महल

क्या किसी ने देखा है खदर के बगल मे महल
जलता हुआ खड़ा है अविचल अटल
यही प्रमाण है उसका 
के वो खदर के बगल मे बना है
मालिक के पैसों के दम पे तना है
वहीं खदर खून पसिने के बहने से बना है
कहते हैं
जो दिखता है वो बिकता है
तभी तो
न बोलने वालों के चने रह जाते हैं 
और बोलने से अकरी बिक जाते हैं
ये सत्य है
वो मालिक क्या जाने मोल महल का
जो मूरत है मजदूरों के पहल का
तभी तो 
महल बिक जाते हैं लाखों में
और खदर रूक जाते हैं वजूद की बातों में
जो दिखता है वो होता नहीं
और जो होता है वो दिखता नहीं
तुम्हें पता नहीं 
चलो मैं बताता हू
महल बनाते वक्त मालिक पैसे देता है 
और वो उसका हिसाब लेता है
पर
पर खदर बनाते वक्त वो व्यक्ति
अपना तन - मन देता है 
धन कम लगे कोई बात नहीं
स्वर्ग है उसका खदर जज्बात वहीं
व्यक्ति चकाचौंध मे खो जाये वो महल 
चैन की निंद जहां सो जाये वो खदर
ये सोंचो जरा 
बदलाव की नई पहल है
देखो खदर के बगल में खड़ा महल है..

          सुखन प्रसाद "जोगी जी"
       मो.  8717918364

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