Thursday, 14 January 2016

तेरे मेरे गूफ्तगु के  चर्चे आम हुए,
ऐसे ही हम बदनाम हुए |
इश्क  द लंगर डाले दर पे तेरे,
हर अदाओं पे तेरे गुलाम हुए |
नक्स नयन कटीले काजल ,
आस्मा पे उड़ता जुल्फों का बादल |
दिल मे खंजर चुभ गया ,
तब से हुए हैं घायल |
शरबती होंटों का शाकी देदे जाम ,
मत कर जहनशी शबाब -ए- हराम |
होके मदहोश करवट तो बदलूं ,
बन जाने दो मुझको गुल्फाम |
गौर फरमाइये हुश्न -ए- मलिका मेरा कलाम ,
जोबन पे तेरा है जो बू - ए - हमाम |
न जा हमसे झटक के दामन यूं ,
लेती जा इस बंदे का सलाम.. सलाम...

                                    "जोगी"

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